पाकिस्तान में हरियाणवी रागनी गा रहे किसान …

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हरियाणा के जींद से बंटवारे की वजह से पाकिस्तान चले गए थे|पाकिस्तान में हरियाणवी रागनी गा रहे किसानों का यह वीडियो वायरल हो रहा है

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लगभग सात दशकों के बाद भी, हरियाणा से जो लोग मौजूदा परिस्थितियों में पाकिस्तान चले गए, वे अपने जन्मस्थान और पड़ोसियों के बारे में उदासीन हैं। आज, जब वे पाकिस्तान के विभिन्न कस्बों और गांवों में बस गए हैं, तब भी उनकी जीवन शैली हरियाणवी है। उन्हें रोहतकी, बागड़ी या हरियाणा में अपने गाँव के नाम से जाना जाता है। वे हरियाणवी बोली बोलते हैं और यहां हरियाणवी लोगों के समान समारोह करते हैं।

जींद(हरियाणा ) के पीपलथा गाँव से रोहिल्लांवाला पाकिस्तान गए कुछ लोग अपनी बोली, संस्कृति बचाये हुए हैं| देखें यह वीडियो|👇

© muhammad alamgir

मुल्तान निवासी मुहम्मद आलमगीर (30), जिनके पूर्वज हिसार जिले के जेवर गाँव से चले गए थे, ने उन्हें भावनाओं का आदान-प्रदान करने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से एक मंच दिया है। आलमगीर ने बताया कि वह अपनी शादी के दौरान अपनी जड़ों के बारे में उत्सुक था। “हम अपने जवान लड़कों और लड़कियों की शादी हरियाणवी समाज में ही करते हैं। मुल्तान में रहने के बावजूद, मुझे मेरे गाँव, यहूदी द्वारा जाना जाता है। मेरे मामा पानीपत जिले के काई गाँव से हैं। इसी तरह, हरियाणा के प्रवासियों को पंजाब, सिंध, मुल्तान राज्यों में रहने वाले मुहाजिर कहा जाता है और भावनगर, भावलपुर और ओकारा जैसे स्थानों की पहचान हरियाणा के गांवों से होती है।

मोहम्मद मुनीर भयान, जिसका वीडियो यूट्यूब और फेसबुक पर “मुहम्मद आलमगीर” द्वारा अपलोड किया गया है, ने कहा कि जब उनके दादा, जो एक नम्बरदार थे, वे गांव में आए और खबरें बताईं कि उन्हें पलायन करना है, “चूंकि वह अफीम का आदी था, इसलिए सभी ने उसे यह कहते हुए फटकार लगाई कि उसने उच्च खुराक के प्रभाव में कुछ खा लिया है। हालांकि, वास्तविकता ग्रामीणों पर जल्द ही हावी हो गई। हमें नंगथला गाँव जाना पड़ा और वहाँ से पाकिस्तान में पंजाब प्रांत तक जाना था।

पाकिस्तान के सेवानिवृत्त व्यक्ति बसीर अहमद, जिन्होंने 1971 के युद्ध में भाग लिया था, और वर्तमान में ओकारा में रहते हैं, ने कहा, “हमारे पास किसी भी जाति या समुदाय के खिलाफ कोई दुर्भावना नहीं है। बहल में 70 घर थे। विभाजन के समय, हमारे बीच कोई दुश्मनी नहीं थी। अन्य समुदायों के लोग, वास्तव में, हमारे साथ लोहारू तक गए और हमें गर्मजोशी से विदा किया। हमने रात में अपनी यात्रा शुरू की और लोहारू पहुँचे।लोहारू में ट्रैन के माध्यम से फिर पाकिस्तान पहुंचे।

ऐसी ही बहुत सी कहानिया और उनके विभाजन के बाद पकिस्तान गए लोगो की वीडियो आपको इनके चैनल “muhammad alamgir ” पर मिल जाएँगी|

फतेहाबाद जिले के गोरखपुर गाँव के एक सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण स्वरूप ने बताया कि जाट, सिवाच, बेनीवाल, पुनिया, बरला, अहलावत, कादियान, पनघल और लोहचब जैसे जाटों के कई लोग मुस्लिम जाटों में से हैं। उन्होंने अब तक अपनी पुश्तैनी और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित किया है चाहे वे हरियाणा में हों या पाकिस्तान में। हिसार, रोहतक और करनाल जिले में रहने वाली लगभग 35 फीसदी से 45 फीसदी आबादी मुस्लिम थी। वे विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए, लेकिन उसी संस्कृति को बचाएं हुए हैं.

देखें एक अन्य वीडियो जिसमे कैथल(हरियाणा ) के रोहरा गाँव से उबाउरो ,सिंध प्रान्त पाकिस्तान गयी बशीरी बीबी की कहानी…..

© muhammad alamgir

कुछ लोगों की राजनीती की वजह से लाखों लोगो को भुगतना पड़ा.. ऐसा भयानक था विभाजन..
इंटरनेट की वजह से भारत पाकिस्तान के लोग आपस में अपनी संस्कृति से जुड़े है, इसी संबंद में यूट्यूब,फेसबुक भी एक अमन का जरिया बने है|

विभाजन का दंश झेल चुकी आखिरी पीढ़ी से मुलाक़ात कर उनकी बाते सुनना व् उनकी भूली बिसरि यादों को समेटना वाकई में अच्छा काम कर रहे हैं पाकिस्तान के मुहम्मद आलमगीर|

also read-http://www.localupdate.in/2020/08/21/syl-canal/

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