कुत्ते की याद में मकबरा..मुगलों के खिलाफ लड़ने वाले ‘वफादार कुत्ते’ की कहानी

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क्या आपने कभी किसी कुत्ते की याद में मकबरा या स्मारक बनते देखा है ?? इसमें कोई शक नही की कुत्ता इंसान का सबसे सच्चा दोस्त है इसकी वफादारी की मिसाले हमेशा से दी जाती रही है इन्ही वफादार कुत्तो में से भारत के इतिहास में एक ऐसा कुत्ता भी हुआ था जिसमे अपनी मालिक के साथ मिलकर मुगलों से रणभूमि में लोहा लिया था | ऐसी ही वफादारी की याद में एक कुत्ते का मकबरा या स्मारक मशहूर है लोहारू कस्बे में ..

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आज से लगभग 350 साल पहले पहले जब मुग़ल बादशाह औरंगजेब अपनी क्रूरता के लिए विख्यात था उस समय औरंगजेब ने राजाओ पे हमला करके उन्हें अपने राज्य में मिला लिया था तभी लोहारू रियासत के एक बहादुर शाशक मदन सिंह ने मुगलों से लोहा लेने की ठान ली

सन् 1671 में ठाकुर मदन सिंह ने बादशाह औरंगजेब को राजस्व देने से इनकार कर दिया। जिससे नाराज होकर बादशाह औरंगजेब ने हिसार गवर्नर अलफू खान को लोहारू पर हमला करने के आदेश दिए | अलफु खान अपनी सेना लेकर लोहारू पहुच गया और भीषण युद्ध शुरू हो गया मदन सिंह की सेना में उनका बहादुर सैनिक बख्तावर सिंह पुरी ताकत से लड़ाई कर रहा था |

बख्तावर सिंह के साथ साथ उनका वफादार कुत्ता भी रणभूमि में बना हुआ था | वो कुत्ता इतना वफादार था कि अपने मालिक को जख्मी करने वाले मुगल सैनिक को नोच डालता था | वो कुत्ता ना केवल अपने मालिक की रक्षा करने बल्कि अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए लड़ रहा था जिसमे मुगलों के 28 सैनिको को बड़ी बेरहमी से मार डाला था |जब मुगल सैनिको ने उस कुत्ते को मुगल सैनिको पर आक्रमण करते देखा तो वो भी दंग रह गये | अब उनके सामने कुत्ता बड़ी चुनौती थी जिसे कोई एक मुगल सैनिक नही सम्भाल सकता था इसलिए सभी मुगल सैनिको ने एक साथ उस कुत्ते पर हमला कर दिया उन सैनिको के साथ बीरता से लड़ते हुए वो कुत्ता वीरगति को प्राप्त हो गया |

Army of Aurangzeb (Pic: summaamare)

उस कुत्ते की मृत्यु के कुछ ही समय बाद उसके मालिक बख्तावर सिंह की भी सभी मुगलों ने एक साथ हमला करके मार डाला | उन दोनों की बाहुदरी के कारण मुगल सेना को घुटने टेकने पड़े थे जिसके कारण अंत में मदन सिंह के आते ही अलफु खान को भागना पड़ा | युद्ध खत्म होने के पश्चात ठाकुर साहब ने उस बहादुर वफादार कुत्ते की याद में एक गुम्बद का निर्माण करवाया जहा पर उस कुत्ते ने वीरगति पायी थी | और जब उस वफादार कुत्ते के मालिक का अंतिम संस्कार किया गया तो उनकी पत्नी भी उन्ही के साथ सती हो गई उनकी याद में भी एक मंदिर बनवाया गया आज भी यह मंदिर लोहारू कस्बे में मौजूद है । पास में ही कुत्ते का स्मारक/ गुम्बंद या मकबरा खंडहर हालत में है । लोहारू कस्बा हरियाणा राज्य के भिवानी जिले में आता है..

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